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दिनांक: 14-08-2026
मूंग एक कम अवधि वाली दलहनी फसल है जो मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है और किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा देती है। इसकी खेती खरीफ और जायद दोनों मौसम में की जा सकती है, जिससे यह किसानों के लिए एक बहुमुखी विकल्प बन जाती है। इस लेख में हम मूंग की खेती की संपूर्ण प्रक्रिया को समझेंगे।
मूंग की खेती खरीफ और जायद दोनों मौसम में की जा सकती है। जायद (ग्रीष्मकालीन) की बुवाई मार्च-अप्रैल में और खरीफ की बुवाई जून-जुलाई में मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद की जाती है। ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती धान या गेहूं के बाद खाली खेत में करके किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।
खेत की अच्छी जुताई करके, समतल बनाकर बुवाई करें। जल निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि मूंग की फसल जलभराव सहन नहीं कर पाती और जड़ सड़न का खतरा बढ़ जाता है। हल्की से मध्यम बनावट वाली दोमट मिट्टी मूंग के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
प्रति हेक्टेयर लगभग 12-15 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। बुवाई से पहले बीज को उपचारित करना बीमारियों से बचाव में मदद करता है। कतारों में बुवाई करने से निराई-गुड़ाई और छिड़काव करना आसान हो जाता है।
मूंग को ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह स्वयं वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती है। हल्की मात्रा में फॉस्फोरस देना फायदेमंद रहता है, जो जड़ विकास और गांठ बनने में मदद करता है।
ग्रीष्मकालीन मूंग में गर्मी ज्यादा होने के कारण 4-5 सिंचाइयों की जरूरत पड़ सकती है, जबकि खरीफ की मूंग में बारिश पर्याप्त होने पर अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत कम ही पड़ती है। फूल और फली बनने के समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए।
पीला मोजैक वायरस मूंग की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, जो सफेद मक्खी के जरिए फैलता है। इसकी रोकथाम के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन और समय पर कीट नियंत्रण जरूरी है। इसके अलावा तना मक्खी और फली छेदक कीट से भी बचाव जरूरी है।
जब 80% फलियां पक कर भूरी हो जाएं, तब कटाई करनी चाहिए। देरी से कटाई करने पर फलियां चटककर दाना झड़ने का खतरा बढ़ जाता है। चूंकि सभी फलियां एक साथ नहीं पकतीं, इसलिए कई बार चरणबद्ध तरीके से तुड़ाई करनी पड़ सकती है।
मूंग की खेती कम समय और कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है, बशर्ते समय पर बुवाई, सही सिंचाई और रोग नियंत्रण का ध्यान रखा जाए। मंडी में मूंग के रोजाना भाव पर नजर रखते हुए सही समय पर बेचने का निर्णय लें।
मूंग की फसल कितने दिन में तैयार होती है?
मूंग की फसल आमतौर पर 60-90 दिन में तैयार हो जाती है, यह किस्म और मौसम पर निर्भर करता है।
मूंग में सबसे बड़ी समस्या कौन सी बीमारी है?
पीला मोजैक वायरस मूंग की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, जो सफेद मक्खी के जरिए फैलता है।
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