आज के ताजा मंडी भाव - प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी
दिनांक: 14-08-2026
सरसों (रायड़ा) रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल है, जो मेड़ता क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। तेल की गुणवत्ता और फैट प्रतिशत के आधार पर मंडी में इसके अलग-अलग भाव मिलते हैं, इसलिए किसानों के लिए इसकी खेती की सही तकनीक समझना बहुत जरूरी है।
अक्टूबर माह में बुवाई करना सबसे उपयुक्त रहता है, इससे पौधों को सर्दी शुरू होने से पहले पूरी बढ़वार का समय मिल जाता है। देरी से बुवाई करने पर पैदावार में कमी आ सकती है।
दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, सरसों के लिए उपयुक्त होती है। प्रति हेक्टेयर लगभग 4-5 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है, बुवाई कतारों में करने से पौधों को उचित स्थान मिलता है।
संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर का उपयोग तेल की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है - खासकर सल्फर तिलहनी फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो तेल की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।
फूल आने और फली बनने के समय पर सिंचाई सबसे ज्यादा जरूरी होती है। इस समय पानी की कमी से उपज में सीधा नुकसान होता है। सामान्यतः 2-3 सिंचाइयां पर्याप्त मानी जाती हैं।
माहू (एफिड) सरसों की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है, जो फूल और फली दोनों को नुकसान पहुंचाता है। समय पर निगरानी और जरूरत पड़ने पर उचित कीटनाशक छिड़काव से बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा सफेद रतुआ रोग से भी सावधानी जरूरी है।
मंडी में सरसों/रायड़ा का भाव उसमें मौजूद तेल के फैट प्रतिशत पर निर्भर करता है - जितना बेहतर फैट प्रतिशत, उतना अच्छा भाव मिलने की संभावना रहती है। इसलिए कटाई के बाद उपज को अच्छी तरह सुखाकर साफ करके ही मंडी लाना चाहिए, ताकि जांच में सही फैट प्रतिशत मिल सके।
सरसों/रायड़ा की खेती में सही समय पर बुवाई, संतुलित सिंचाई-खाद और गुणवत्तापूर्ण फसल तैयार करना ही बेहतर भाव की कुंजी है। मंडी में रोजाना भाव पर नजर रखकर सही समय पर बिक्री का निर्णय लें।
सरसों/रायड़ा की बुवाई का सही समय क्या है?
अक्टूबर माह में सरसों की बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
फैट प्रतिशत का भाव पर क्या असर पड़ता है?
बेहतर फैट प्रतिशत वाले रायड़े को मंडी में ज्यादा अच्छा भाव मिलता है, क्योंकि इससे तेल की मात्रा और गुणवत्ता ज्यादा होती है।
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