कृषि उपज मंडी समिति मेड़ता सिटी

आज के ताजा मंडी भाव - प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी

ग्वार की खेती और उपयोग - किसानों के लिए पूरी जानकारी

दिनांक: 14-08-2026

ग्वार राजस्थान की परंपरागत खरीफ फसल है, जिसका इस्तेमाल खाद्य के साथ-साथ औद्योगिक गोंद (ग्वार गम) बनाने में भी होता है। इसी वजह से मंडी में इसके भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है, जिससे यह शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष महत्व रखती है।

बुवाई का समय

मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद, जून-जुलाई में ग्वार की बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है। बहुत जल्दी बुवाई करने पर बीज के अंकुरण पर असर पड़ सकता है।

भूमि और जलवायु

ग्वार कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकता है, इसीलिए यह शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल मानी जाती है। हल्की से मध्यम बनावट वाली रेतीली दोमट मिट्टी ग्वार के लिए उपयुक्त होती है।

बुवाई विधि और बीज दर

प्रति हेक्टेयर लगभग 15-20 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। कतारों में बुवाई करने से बाद में निराई-गुड़ाई और कटाई करना आसान हो जाता है।

देखभाल और सिंचाई

शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि इस समय ग्वार के पौधे कमजोर होते हैं। फूल आने के समय हल्की नमी बनाए रखने से फली बनने में मदद मिलती है। सामान्यतः बारिश पर्याप्त होने पर अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत कम ही पड़ती है।

रोग व कीट प्रबंधन

बैक्टीरियल ब्लाइट और जड़ सड़न ग्वार की प्रमुख समस्याएं हैं, खासकर ज्यादा नमी वाले मौसम में। समय पर बीज उपचार और खेत में उचित जल निकासी इन समस्याओं से बचाव में मदद करती है।

भाव को प्रभावित करने वाले कारक

ग्वार गम (Guar Gum) की अंतरराष्ट्रीय मांग का सीधा असर मंडी भाव पर पड़ता है, खासकर तेल उद्योग में इसके इस्तेमाल की वजह से। इसलिए किसानों को वैश्विक मांग, मौसम और बुवाई क्षेत्रफल जैसी खबरों पर भी नजर रखनी चाहिए ताकि सही समय पर बेचने का फैसला लिया जा सके।

ग्वार की खेती कम पानी में भी अच्छा मुनाफा देने की क्षमता रखती है। सही समय पर बुवाई, देखभाल और मंडी के रुझान को समझकर किसान इस फसल से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

जरूरी सवाल-जवाब

ग्वार की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय क्या है?

मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद, जून-जुलाई में ग्वार की बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

ग्वार के भाव में उतार-चढ़ाव क्यों होता है?

ग्वार गम की अंतरराष्ट्रीय मांग और औद्योगिक इस्तेमाल का सीधा असर मंडी भाव पर पड़ता है।

ब्लॉग पर वापस जाएं होम पेज